'क्या ऐसे होगा भोले के भक्तों का स्वागत' शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया नगर पालिका प्रशासन, स्थानीय लोगों ने कहा-मिट्टी से नहीं, स्थायी मरम्मत से होगा समाधान
गंजडुंडवारा। कांवड़ यात्रा के दौरान एटा रोड की बदहाल सड़क को लेकर प्रकाशित समाचार "क्या ऐसे होगा भोले के भक्तों का स्वागत... हर-हर महादेव के जयघोष के बीच गड्ढों से जूझेंगे शिवभक्त" का असर रविवार शाम देखने को मिला। खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा की टीम एटा रोड पहुंची और सड़क पर बने गहरे गड्ढों को मिट्टी डालकर भरने का कार्य शुरू कराया।
गौरतलब है कि खबर में प्रमुखता से उठाया गया था कि पटियाली के कादरगंज गंगा घाट से हजारों शिवभक्त गंगाजल लेकर गंजडुंडवारा की एटा रोड से गुजरते हैं, लेकिन सड़क पर बने गहरे गड्ढे, उखड़ी डामर और जर्जर मार्ग उनकी आस्था की राह को कठिन बना रहे हैं। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया था कि नगर पालिका परिषद द्वारा समय-समय पर गड्ढा मुक्ति अभियान के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद सड़क की हालत बार-बार बदहाल क्यों हो जाती है।
समाचार प्रकाशित होने के तीसरे ही दिन बाद नगर पालिका प्रशासन ने गड्ढों में मिट्टी डलवाकर राहत देने का प्रयास किया। हालांकि यह कार्रवाई भी विवादों में घिरती नजर आ रही है। स्थानीय निवासी पंकज गुप्ता एवं रोहिताश ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गड्ढों में मिट्टी डालना कोई स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि यदि बारिश हुई तो यही मिट्टी कीचड़ में बदल जाएगी और सड़क पर दलदल जैसी स्थिति बन जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान हजारों शिवभक्त नंगे पैर इसी मार्ग से गुजरते हैं। यदि मिट्टी भीगकर कीचड़ में बदल गई तो श्रद्धालुओं को गड्ढों के साथ-साथ फिसलन और दलदल का भी सामना करना पड़ेगा। इससे केवल कांवड़ियों को ही नहीं, बल्कि एटा रोड से गुजरने वाले आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
नगरवासियों का कहना है कि प्रशासन की तत्परता सराहनीय है, लेकिन केवल मिट्टी डालकर औपचारिकता पूरी करने के बजाय सड़क की गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ मरम्मत कराई जानी चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि गड्ढा मुक्ति अभियान पर पहले ही लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं तो अब ऐसी अस्थायी व्यवस्था की नौबत क्यों आई।