छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप; सांसद पहले ही मुख्यमंत्री से कर चुके हैं निष्पक्ष जांच की मांग
सिढ़पुरा। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 16 वर्षीय छात्रा अनन्या मिश्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। छात्रा के पिता निर्दोष कुमार मिश्रा की तहरीर पर सिढ़पुरा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तहरीर में पार्वती राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के एक चपरासी, प्रधानाचार्या, कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन तथा विद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए एटा के सांसद देवेश शाक्य भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग कर चुके हैं।
पुलिस को दी गई तहरीर में सिढपुरा निवासी निर्दोष कुमार मिश्रा ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय पुत्री अनन्या मिश्रा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के छात्रावास में रहकर पार्वती राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, सिढ़पुरा में कक्षा-10 की पढ़ाई कर रही थी। 29 जुलाई को विद्यालय के कर्मचारी अनुज ने फोन कर सूचना दी कि उनकी बेटी ने फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही वह परिजनों के साथ विद्यालय पहुंचे, जहां छात्रा का शव कमरे में पंखे से लटका मिला। उस समय प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस पहले से मौके पर मौजूद थे।
तहरीर में लगाए गंभीर आरोप
एफआईआर में छात्रा के पिता ने आरोप लगाया है कि पार्वती राष्ट्रीय इंटर कॉलेज का चपरासी निखिल, पुत्र मनोज, निवासी वाजीदपुर, उनकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ करता था और उसे लगातार शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी विद्यालय की प्रधानाचार्या जयवंती शुक्ला और कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन राधा को भी थी, लेकिन उन्होंने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायत के बाद छात्रा को न्याय दिलाने के बजाय प्रधानाचार्या और वार्डन ने उसे डांट-फटकार लगाई तथा कथित रूप से "मर जाने" जैसी बातें कहीं। इससे आहत होकर छात्रा ने आत्मघाती कदम उठा लिया। पिता ने अपनी बेटी की मौत के लिए चपरासी, प्रधानाचार्या, वार्डन और विद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए सभी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दाह संस्कार के कारण देर से दी तहरीर
निर्दोष कुमार मिश्रा ने पुलिस को बताया कि बेटी के अंतिम संस्कार और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह तत्काल थाने नहीं पहुंच सके। 1 अगस्त को उन्होंने सिढ़पुरा थाने पहुंचकर लिखित तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच महावीर सिंह को सौंपी गई है।
पहले ही सामने आ चुकी है बड़ी लापरवाही
इस मामले की जांच के दौरान यह भी खुलासा हो चुका है कि घटना के समय छात्रावास की वार्डन अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं। कागजों में किसी अन्य के नाम प्रभार दर्ज था, जबकि वास्तविक रूप से वार्डन की बेटी छात्रावास में ड्यूटी कर रही थी। इस गंभीर लापरवाही पर खंड शिक्षा अधिकारी ने वार्डन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी है।
सांसद ने भी मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
घटना को लेकर एटा लोकसभा क्षेत्र के सांसद देवेश शाक्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा आपराधिक भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला केवल संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और संस्थागत लापरवाही जैसे गंभीर आरोपों के कारण जांच का दायरा और भी व्यापक हो गया है। पुलिस और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।