पटियाली, राहुल गुप्ता। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने प्रदेश एवं जनपद स्तर की वर्षों से लंबित मांगों के समाधान को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को संघ के जिला अध्यक्ष दीपक भारद्वाज ने सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी प्रणय सिंह के माध्यम से राजस्व परिषद के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
जिला अध्यक्ष दीपक भारद्वाज एवं जिला मंत्री आदित्य गौतम ने बताया कि प्रदेश स्तर पर वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची तत्काल जारी करने, वर्ष 2024 बैच की विभागीय परीक्षा के परिणाम एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र घोषित करने, अंतर्मंडलीय स्थानांतरण पोर्टल दोबारा खोलने तथा लेखपालों के वाहन, वर्दी एवं स्टेशनरी भत्ते में बढ़ोतरी की मांग की गई है। इसके साथ ही लेखपालों को गैर-राजस्व विभागों के अनावश्यक कार्यों से मुक्त करने और ग्राम सचिवालयों में बैठने, फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली, पेयजल एवं सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई है।
संघ ने जनपद कासगंज की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2015-16 की कृषि गणना का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। कई लेखपालों के नवीन पेंशन प्रणाली (एनपीएस) खाते अब तक नहीं खोले गए हैं, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये तक की संभावित आर्थिक हानि हो रही है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जनपद में स्वीकृत पदों की तुलना में लेखपालों की संख्या काफी कम है। लगभग 50 प्रतिशत लेखपाल पिछले दस वर्षों से दो या दो से अधिक हलकों का कार्यभार संभाल रहे हैं। रिक्त पदों का सीधा असर राजस्व कार्यों की गुणवत्ता, जनसेवा तथा कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वहीं वर्तमान में मात्र 800 रुपये प्रतिमाह मकान किराया भत्ता (एचआरए) और 300 रुपये प्रतिमाह यात्रा भत्ता महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त बताया गया।
लेखपाल संघ ने कहा कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की आधारशिला हैं और किसानों से लेकर शासन की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि शासन और राजस्व परिषद ने समयबद्ध समाधान नहीं किया तो प्रदेश स्तर पर घोषित कार्यक्रम के तहत 5 अगस्त से अतिरिक्त हल्कों का कार्य छोड़कर केवल मूल हल्के पर कार्य किया जाएगा, जबकि 10 अगस्त से सभी ऑनलाइन कार्य भी बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन की अगली रणनीति घोषित की जाएगी।