Friday, September 11, 2026

KASGANJ:जलशक्ति मंत्री ने कहा था....फिर बाढ में न डूबे गांव', लेकिन जलस्तर बढ़ते ही पहले ही दिन बिगडने लगे हालात

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: August 2, 2026

KASGANJ:जलशक्ति मंत्री ने कहा था....फिर बाढ में न डूबे गांव', लेकिन जलस्तर बढ़ते ही पहले ही दिन बिगडने लगे हालात

एक वर्ष बाद भी नहीं बना तटबंध, गंगा का पानी खेतों से बढ़कर आबादी की ओर; ग्रामीण बोले-अब सिर्फ आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

पटियाली। पिछले वर्ष बाढ़ के बीच नरदौली क्षेत्र पहुंचे प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि अब उन्हें हर साल बाढ़ की तबाही नहीं झेलनी पड़ेगी। अधिकारियों को गंगा किनारे तटबंध निर्माण के निर्देश दिए गए, मंचों से भरोसे बंधाए गए और राहत का संदेश दिया गया। लेकिन एक साल बाद तस्वीर बिल्कुल उलट है। गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पहले ही दिन दावों की पोल खुलती नजर आने लगी है। खेतों में पानी भर चुका है और अब उसकी रफ्तार आबादी की ओर है। गांवों में फिर वही सवाल गूंज रहा है—आखिर तटबंध कब बनेगा।


नरदौली क्षेत्र के नगला हंसी, मूजखेड़ा, नगला नरपत और नगला दुर्जन सहित कई गांवों में गंगा का पानी खेतों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों के चेहरों पर पिछले साल की बाढ़ की भयावह तस्वीरें फिर ताजा हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तटबंध बन गया होता तो आज यह नौबत नहीं आती। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ पहले पहुंच गई और इंतजाम पीछे रह गए।


ग्रामीणों का कहना है कि नगला हंसी से जनपद सीमा तक गंगा किनारे तटबंध का मामला वर्षों से फाइलों में घूम रहा है। गांवों को जोड़ने वाली मुख्य पुलिया भी लंबे समय से बदहाल है। जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ता है, पानी इसी रास्ते गांवों की ओर बढ़ने लगता है और दर्जनों गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूटने की आशंका पैदा हो जाती है। मरीज, स्कूली बच्चे और किसान सबसे पहले इसकी कीमत चुकाते हैं।


पिछले वर्ष आई बाढ़ में भी नरदौली क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव एक महीने तक टापू बने रहे। लोग नावों के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हुए और हजारों बीघा फसलें पानी में समा गईं। उस समय राहत सामग्री वितरण के दौरान पहुंचे जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने समस्या के स्थायी समाधान का भरोसा दिया था। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने जिलाधिकारी प्रणय सिंह से यहां तक कह दिया था कि "तटबंध के लिए हमारी जमीन ले लीजिए, लेकिन हमें हर साल बाढ़ से बचा लीजिए।" जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को रोडमैप तैयार करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन एक साल बाद भी जमीन पर निर्माण शुरू नहीं हो सका।

अब हालात यह हैं कि गंगा का जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीण फिर उसी डर के साए में जीने को मजबूर हैं। गांवों में चर्चा है कि हर वर्ष अधिकारी आते हैं, निरीक्षण करते हैं, आश्वासन देकर लौट जाते हैं और पानी उतरते ही बाढ़ का मुद्दा भी सरकारी फाइलों में दफन हो जाता है। स्थायी समाधान आज भी इंतजार में है।

ग्रामीण दुर्वेश का कहना है कि यदि तटबंध बन जाए तो हजारों किसानों की जमीन और कई गांव सुरक्षित हो जाएंगे। दिनेश का कहना है कि ग्रामीण जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। वही छात्रो का कहना है कि पानी बढ़ने से स्कूल आना-जाना मुश्किल हो जाता है, जबकि नगला नरपत निवासी आदेश का कहना है कि तटबंध ही बाढ़ से बचाव का एकमात्र स्थायी उपाय है।

अब ग्रामीणों की मांग साफ है—निरीक्षण नहीं, निर्माण चाहिए; आश्वासन नहीं, तटबंध चाहिए। क्योंकि गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो चुका है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हालात पिछले वर्ष जैसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

विभाग की रिपोर्ट अनुसार गंगा का जलस्तर

  • कछला ब्रिज पर खतरे का निशान: 162.400 मीटर
  • वर्तमान जलस्तर: 162.480 मीटर, यानी खतरे के निशान से 0.080 मीटर ऊपर
  • कछला ब्रिज पर ट्रेंड: जलस्तर फिलहाल स्थिर (Stable)
  • नरौरा बैराज से डिस्चार्ज: 1,72,721 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है
  • कछला ब्रिज से गुजर रहा डिस्चार्ज: 1,72,721 क्यूसेक
  • भीमगौड़ा बैराज व मध्य गंगा बैराज बिजनौर पर जलस्तर घटने (Decrease) का ट्रेंड दर्ज किया गया
  • वर्षा: कासगंज में 6 मिमी तथा नरौरा क्षेत्र में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई
  • सिंचाई विभाग ने बाढ़ नियंत्रण तंत्र को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिपोर्ट साफ बता रही है कि गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि अब निरीक्षण और आश्वासन के बजाय क्षेत्र मे तटबंध निर्माण कराया जाए, ताकि हर वर्ष आने वाली बाढ़ की त्रासदी से स्थायी राहत मिल सके।

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