वराह भगवान के दरबार में पुष्पवर्षा से हुआ भव्य स्वागत, उज्जैन के डमरू वादकों ने बांधा समां
सोरों (अंकित पंडित)। श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर तीर्थ नगरी सोरों शूकरक्षेत्र शिवमय हो उठी। भगवान सोमेश्वर महादेव की भव्य शाही सवारी पूरे धार्मिक उल्लास और पारंपरिक वैभव के साथ निकाली गई। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती शाही पालकी के दर्शन के लिए सड़क किनारे श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा वातावरण "हर-हर महादेव" और "जय वराह भगवान" के गगनभेदी जयघोष से भक्तिमय हो गया।
शाही सवारी का भव्य स्वागत भगवान वराह के प्राचीन मंदिर में पुष्पवर्षा के साथ किया गया। यहां भगवान वराह और भगवान सोमेश्वर महादेव के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना एवं महाआरती संपन्न हुई। एक साथ दोनों देवों के दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और मंदिर परिसर में देर तक भक्ति की रसधारा बहती रही।
शाही सवारी में उज्जैन से आए डमरू वादकों की मनमोहक प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डमरू की गूंज, शंखनाद और भजनों की स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालु शिवभक्ति में झूमते नजर आए। नगर भ्रमण के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु, संत-महात्मा और शिवभक्त शाही सवारी के साथ चलते रहे, जबकि मंदिर परिसर में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दर्शन-पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
नगर भ्रमण के उपरांत भगवान सोमेश्वर महादेव की शाही सवारी पुनः मंदिर पहुंची, जहां भव्य महाआरती के साथ आयोजन का समापन हुआ। श्रावण के प्रथम सोमवार पर आयोजित इस दिव्य धार्मिक आयोजन ने सोरों की आध्यात्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति की भव्यता को एक बार फिर जीवंत कर दिया।