आधा दर्जन से अधिक गांवों का आवागमन प्रभावित, स्टीमर के सहारे जिंदगी; पिछले साल की तबाही याद कर सहमे रह ग्रामीण
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर जरूर हो गया है, लेकिन कासगंज की तहसील पटियाली क्षेत्र के गंगा तटीय गांवों में रहने वाले लोगों की धड़कनें अब भी तेज हैं। नदी का शांत दिखता पानी भी पिछले वर्ष की बाढ़ की दर्दनाक यादों को ताजा कर रहा है। किसी की आंखों के सामने डूबती फसलों का मंजर घूम रहा है तो किसी को घर छोड़कर सड़क किनारे गुजारी गई रातें याद आ रही हैं। हर चेहरा एक ही दुआ कर रहा है—"हे गंगा मैया... इस बार रहम कर देना।"
पटियाली तहसील के नगला दुर्जन, नगला दीपी, नगला नैनसुख, नगला जयकिशन, नगला खाना, नगला चतुरी, नगला जैली, नगला पदम, मूजखेड़ा, नगला हंसी, सहित कई गांवो का आवागमन पूरी तरह टूट चुका है। चारों ओर फैले पानी ने इन गांवों को टापूनुमा बना दिया है। हजारों लोगों की जिंदगी अब केवल एक स्टीमर के सहारे चल रही है। स्टीमर के आने का इंतजार करना अब लोगों की मजबूरी बन गया है।
गांवों में सबसे बड़ी चिंता किसी अनहोनी की है। यदि कोई बीमार पड़ जाए, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, बच्चों के लिए दूध और दवा लानी हो या किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े, तो लोगों को घंटों स्टीमर का इंतजार करना पड़ता है। बारिश और तेज बहाव के बीच यह सफर भी जोखिम भरा बना हुआ है।
निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों ने पहले ही अपने घरों से अनाज, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। पशुपालक रातभर जागकर मवेशियों की निगरानी कर रहे हैं।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए एहतियातन कई प्रभावित गांवों की विद्युत आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इससे लोगों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। घरों में अंधेरा पसरा है, पीने के पानी के लिए चलने वाली मोटरें बंद हैं, मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो पा रहे हैं और रात के समय बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उमस भरी गर्मी में बिजली न होने से लोगों का हाल बेहाल है।
ग्रामीण बताते हैं कि पिछले वर्ष की बाढ़ ने सिर्फ घर और खेत नहीं उजाड़े थे, बल्कि लोगों की जमा-पूंजी, फसलें और उम्मीदें भी बहा दी थीं। कई परिवारों को सड़क किनारे शरण लेनी पड़ी थी। उसी दर्दनाक अनुभव ने इस बार लोगों को पहले ही डरा दिया है। इसलिए जलस्तर स्थिर होने के बाद भी किसी के चेहरे पर राहत नहीं दिखाई दे रही।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल नावों और स्टीमर की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि लोगों को आवागमन में राहत मिल सके। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें तैनात की जाएं, जरूरत पड़ने पर राहत शिविर शुरू किए जाएं, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जाए और खाद्य सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। लोगों ने यह भी मांग की है कि विद्युत आपूर्ति बंद रहने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर भले ही फिलहाल थम गया हो, लेकिन उनका डर अभी नहीं थमा है। हर निगाह नदी की ओर टिकी है और हर जुबान पर बस एक ही प्रार्थना है—"गंगा मैया, इस बार रहम कर देना।