28 जुलाई को 'क्या ऐसे होगा भोले के भक्तों का स्वागत' शीर्षक से उठाया था मुद्दा, खबरों और जनविरोध के बाद बदली कार्ययोजना; प्रभारी ईओ एवं एसडीएम मोहम्मद नासिर ने संभाली थी कमान
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की जागरण टुडे की पहल आखिरकार रंग लाई। कावंड यात्रा शुरु होने से पूर्व 28 जुलाई को "क्या ऐसे होगा भोले के भक्तों का स्वागत... हर-हर महादेव के जयघोष के बीच गड्ढों से जूझेंगे शिवभक्त, कांवड़ियों के पैर जख्मी करेंगे सड़क के गड्ढे" शीर्षक से एटा रोड की बदहाल स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर में सवाल उठाया गया था कि कादरगंज गंगा घाट से गंगाजल लेकर गुजरने वाले हजारों शिवभक्त आखिर जर्जर सड़क और गहरे गड्ढों के बीच सुरक्षित यात्रा कैसे करेंगे। साथ ही यह भी पूछा गया था कि गड्ढा मुक्ति अभियान पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की हालत बार-बार बदहाल क्यों हो जाती है।
खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा हरकत में आई और एटा रोड के गड्ढे भरने का कार्य शुरू कराया गया। लेकिन जल्दबाजी में गड्ढों में पीली मिट्टी डालकर मरम्मत की जाने लगी। यह व्यवस्था शुरू होते ही स्थानीय लोगों के निशाने पर आ गई। लोगों ने आशंका जताई कि बारिश होने पर यही मिट्टी कीचड़ में बदल जाएगी, जिससे नंगे पैर चलने वाले कांवड़ियों के फिसलने और चोटिल होने का खतरा बढ़ जाएगा। इस लापरवाही को जागरण टुडे ने प्रकाशित किया।
सोशल मीडिया पर भी इस व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया। स्थानीय नागरिकों ने इसे केवल औपचारिकता बताते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी मरम्मत की मांग उठाई। बढ़ते विरोध और लगातार उठ रहे सवालों के बाद प्रभारी अधिशासी अधिकारी अपर उपजिलाधिकारी मोहम्मद नासिर ने स्वयं मौके पर पहुंचकर एटा रोड का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने गड्ढों में डाली गई मिट्टी हटाने के निर्देश दिए। स्वच्छता प्रभारी तसलीम अहमद को सड़क से मिट्टी निकलवाकर सफाई कराने तथा अवर अभियंता हेमंत कुमार को सीमेंट एवं कंक्रीट के मिश्रण से गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की कार्ययोजना तैयार कर तत्काल कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उनके निर्देशों के बाद अब एटा रोड पर सीमेंट-कंक्रीट से गड्ढों की मरम्मत का कार्य शुरू हो चुका है।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शुरुआत में ही तकनीकी मानकों के अनुरूप टिकाऊ मरम्मत कराई जाती, तो पहले मिट्टी डालने, फिर उसे हटाने और उसके बाद दोबारा सीमेंट-कंक्रीट से मरम्मत कराने जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। इससे सरकारी समय, श्रम और संसाधनों की दोहरी खपत भी हुई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने भले ही देर से सही, लेकिन अब सही दिशा में कदम उठाया है। लोगों को उम्मीद है कि अब एटा रोड की मरम्मत गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी होगी और भगवान भोलेनाथ के हजारों भक्तों को सुरक्षित एवं सुगम मार्ग मिल सकेगा।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण भी बन गया है कि जब जनहित के मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाया जाता है और जनता की आवाज बुलंद होती है, तो व्यवस्था को अपनी कार्यप्रणाली बदलनी पड़ती है।