Friday, September 11, 2026

KASGANJ:जख्मों से कराहती रही सड़क....कर्मचारी टटोलते रहे घाव, मजदूर लगाते गए टांके,विकास की तस्वीर या बदहाली की दास्तां

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: August 6, 2026

KASGANJ:जख्मों से कराहती रही सड़क....कर्मचारी टटोलते रहे घाव, मजदूर लगाते गए टांके,विकास की तस्वीर या बदहाली की दास्तां

गंजडुंडवारा के एटा रोड कांवड़ यात्रा से पहले दिन-रात चला मरम्मत अभियान; एक ही सड़क पर 200 से अधिक गड्ढे बने नगर में चर्चा का विषय, लोगों ने पूछा- आखिर इतने दिनों तक जिम्मेदारों की कहां थी नजर कहां

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

गंजडुंडवारा। विकास की राह देखने वाली एटा रोड गुरुवार को अपने ही जख्मों से कराहती नजर आई। सड़क पर एक-दो नहीं, बल्कि 200 से अधिक गड्ढे ऐसे मिले, जिन्हें भरने के लिए नगर पालिका के कर्मचारियों और मजदूरों को दिन-रात मशक्कत करनी पड़ी। दृश्य कुछ ऐसा था, मानो कोई चिकित्सक लंबे समय से घायल मरीज के शरीर पर एक-एक कर टांके लगा रहा हो। सड़क का हर पैबंद उसकी बदहाली की कहानी कह रहा था।


एक ओर कर्मचारी सड़क के जख्म टटोलते रहे, दूसरी ओर मजदूर सीमेंट और कंक्रीट के मिश्रण से उन घावों पर पैबंद लगाते रहे। मगर सड़क को राहत तब भी नसीब नहीं हुई। यातायात रोकने की कोशिशें होती रहीं, लेकिन जबरन वाहनों के आवागमन का सिलसिला नहीं थमा। कई बार मजदूरों को औजार छोड़कर किनारे हटना पड़ा, वाहन गुजरने के बाद वे फिर उसी गड्ढे को भरने में जुट गए। ऐसा लग रहा था मानो सड़क के जख्म भरने और वाहनों के पहियों के बीच एक साथ संघर्ष चल रहा हो।


यह नजारा देखकर राहगीरों के मन में एक ही सवाल बार-बार उठता रहा—"अगर आज एक ही सड़क पर 200 से अधिक गड्ढे भरने पड़ रहे हैं, तो आखिर इतने दिनों तक जिम्मेदारों की नजर इस बदहाली पर क्यों नहीं पड़ी"


नगर में अब इसी बात की चर्चा हो रही है। लोग भावुक तंज करते हुए कहते नजर आए—"आज सड़क पर पैबंद नहीं लग रहे, बल्कि वर्षों की अनदेखी पर पर्दा डाला जा रहा है।" किसी ने कहा—"सड़क रोती रही, फाइलें सोती रहीं।" तो किसी ने व्यंग्य किया—"कांवड़ यात्रा सिर पर आई, तब जाकर व्यवस्था की नींद खुली।" वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि "अगर समय पर सड़क की सुध ली गई होती, तो आज 200 से अधिक घाव भरने की नौबत ही नहीं आती।"


गौरतलब है कि जागरण टुडे ने 28 जुलाई को "क्या ऐसे होगा भोले के भक्तों का स्वागत..." शीर्षक से एटा रोड की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद पहले गड्ढों में मिट्टी डालकर मरम्मत की गई, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद वह मिट्टी हटानी पड़ी। अंततः प्रभारी अधिशासी अधिकारी एवं अपर उपजिलाधिकारी मोहम्मद नासिर ने स्वयं मौके का निरीक्षण कर सीमेंट-कंक्रीट से टिकाऊ मरम्मत कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद बुधवार को युद्धस्तर पर कार्य शुरू हुआ।

निस्संदेह, इस मरम्मत से कांवड़ यात्रा के दौरान हजारों शिवभक्तों और आम राहगीरों को राहत मिलेगी। लेकिन एक ही सड़क पर 200 से अधिक गड्ढों का मिलना अपने आप में ऐसा आईना है, जिसमें वर्षों की उपेक्षा और अव्यवस्था साफ दिखाई देती है। सड़क के घाव तो शायद भर जाएंगे, मगर उन सवालों का जवाब अभी भी बाकी है कि आखिर विकास की राह इतनी घायल कैसे हो गई।

अब नगरवासियों की उम्मीद सिर्फ इतनी नहीं है कि गड्ढे भर जाएं, बल्कि यह भी है कि भविष्य में सड़कों को हर साल पैबंदों के सहारे न छोड़ दिया जाए। क्योंकि सड़कों को बार-बार मरहम नहीं, समय पर मजबूत निर्माण और जिम्मेदार रखरखाव की जरूरत होती है।

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