जागरण टुडे की पहल के बाद शुरू हुई मरम्मत, लेकिन दो दिन बाद भी आवागमन प्रभावित; बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, दुकानदारों का कारोबार ठप, लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। कांवड़ यात्रा से पहले एटा रोड की बदहाल स्थिति को लेकर उठे सवालों के बाद नगर पालिका परिषद द्वारा शुरू कराया गया मरम्मत कार्य अब उसकी कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर रहा है। सड़क की मरम्मत के लिए पूरे मार्ग को बंद कर कार्य शुरू कराया गया, लेकिन 48 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो एटा रोड पर सामान्य आवागमन बहाल हो सका और न ही सड़क पूरी तरह दुरुस्त हो सकी। इससे आमजन, व्यापारियों, वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर में अब चर्चा मरम्मत से ज्यादा उसके कारण पैदा हुई अव्यवस्था की हो रही है।
गौरतलब है कि जागरण टुडे ने 28 जुलाई को "क्या ऐसे होगा भोले के भक्तों का स्वागत..." शीर्षक से एटा रोड की जर्जर हालत को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार में बताया गया था कि पटियाली के कादरगंज गंगा घाट से हजारों कांवड़िये इसी मार्ग से गंगाजल लेकर गुजरते हैं, लेकिन जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई डामर और जर्जर सड़क उनकी आस्था की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन हरकत में आया और मरम्मत कार्य शुरू कराया गया।
शुरुआत में नगर पालिका ने गड्ढों में पीली मिट्टी डालकर मरम्मत का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। लोगों का कहना था कि बारिश होने पर मिट्टी कीचड़ में बदल जाएगी और कांवड़ यात्रियों के लिए फिसलन का कारण बनेगी। विरोध के बाद प्रभारी अधिशासी अधिकारी एवं अपर उपजिलाधिकारी मोहम्मद नासिर ने स्वयं मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने मिट्टी हटवाने के निर्देश दिए तथा नगर पालिका के अवर अभियंता को सीमेंट-कंक्रीट मिश्रण से टिकाऊ मरम्मत कराने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
इसके बाद बुधवार से सीमेंट-कंक्रीट से मरम्मत का कार्य शुरू किया गया। कर्मचारी सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों का निरीक्षण करते रहे और मजदूर लगातार गड्ढों को भरने में जुटे रहे। इसी बीच हुई बारिश ने भी कार्य की रफ्तार पर असर डाला। कई स्थानों पर कंक्रीट को जमने में समय लगा तो कहीं बारिश के कारण कार्य रोकना पड़ा।
आलम यह है कि 48 घंटे से अधिक समय तक मार्ग बंद रहने के बावजूद सड़क के कई हिस्सों में गड्ढे अब भी बरकरार हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब सड़क पूरी तरह दुरुस्त ही नहीं हुई, तो इतनी लंबी अवधि तक मार्ग बंद रखने का औचित्य क्या था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत आवश्यक थी, लेकिन इसे बेहतर योजना के साथ किया जा सकता था। उनका कहना है कि यदि सड़क के एक हिस्से को बंद कर चरणबद्ध तरीके से कार्य कराया जाता तो आवागमन भी जारी रहता और मरम्मत भी प्रभावित नहीं होती। पूरे मार्ग को एक साथ बंद करने से लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अब हालात यह हैं कि बुधवार से बंद एटा रोड पर 48 घंटे से अधिक समय बाद भी सामान्य आवागमन शुरू नहीं हो सका है। सड़क बंद होने से स्थानीय बाजार पर भी सीधा असर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही कम होने से कारोबार लगभग ठप हो गया है। वहीं वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों से लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की टिकाऊ मरम्मत निश्चित रूप से आवश्यक थी, लेकिन कार्य की समयबद्धता और यातायात प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। लोगों का मानना है कि यदि सड़क का नियमित रखरखाव होता और मरम्मत की पूर्व योजना बेहतर बनाई जाती, तो कांवड़ यात्रा से ठीक पहले पूरे मार्ग को कई दिनों तक बंद रखने की नौबत नहीं आती।
फिलहाल नगरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एटा रोड कब पूरी तरह आवागमन के लिए खोली जाएगी। लोगों को उम्मीद है कि शेष गड्ढों की भी जल्द मरम्मत कर सड़क को सुचारु किया जाएगा, ताकि आमजन और कांवड़ यात्रियों को राहत मिल सके।