भारत-बांग्लादेश सीमा से पश्चिम बंगाल के रास्ते यूपी पहुंच रही थी हाई क्वालिटी की नकली करेंसी, नेटवर्क की जांच में जुटी एटीएस
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कासगंज। भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश लाई जा रही हाई क्वालिटी की नकली भारतीय करेंसी की तस्करी का यूपी एटीएस ने खुलासा किया है। एटीएस ने सात अगस्त को लखनऊ में कार्रवाई करते हुए कासगंज जिले के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से 500-500 रुपये के 201 नकली नोट बरामद किए गए। बरामद नकली नोटों की कुल अंकित कीमत 1 लाख 500 रुपये बताई गई है।
एटीएस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजीम खान पुत्र मुजीम खान और राजा उर्फ समीमुल पुत्र स्व. अहमद हसन के रूप में हुई है। दोनों गणेशपुर गांव के रहने वाले बताए गए हैं। आरोपियों को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया।
हाई क्वालिटी के बताए जा रहे नकली नोट
एटीएस की प्रारंभिक जांच में बरामद नोटों की क्वालिटी काफी बेहतर पाई गई है। प्रथम दृष्टया इन्हें हाई क्वालिटी के नकली भारतीय नोट माना जा रहा है। हालांकि नोटों की वास्तविक प्रमाणिकता और गुणवत्ता की विस्तृत जांच के लिए इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
पश्चिम बंगाल से यूपी तक पहुंच रहा था नेटवर्क
एटीएस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पश्चिम बंगाल से नकली भारतीय करेंसी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पहुंचा रहे हैं। आशंका थी कि इन नकली नोटों को बाजार में चलाकर देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सूचना के आधार पर एटीएस ने निगरानी बढ़ाई और कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल की आशंका
एटीएस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में दोनों आरोपियों के हाई क्वालिटी की नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी से जुड़े होने के तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि नकली करेंसी का इस्तेमाल देश की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करने के साथ ही संभावित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में किया जा सकता था।
201 नकली नोट मिलने से खलबली, नेटवर्क खंगाल रही एटीएस
दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना एटीएस, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अब एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट आरोपियों तक कहां से पहुंचे, पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश तक इन्हें किस नेटवर्क के जरिए लाया गया और इन्हें आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। इसके साथ ही इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।