जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
नकली भारतीय करेंसी के मामलों से कासगंज जिले का नाता नया नहीं है। गंजडुंडवारा क्षेत्र के गणेशपुर गांव का नाम पहले भी नकली नोटों के एक मामले में सामने आ चुका है। अब एक बार फिर इसी गांव के दो युवकों की गिरफ्तारी ने नकली करेंसी के संभावित नेटवर्क को लेकर पुराने मामले की यादें ताजा कर दी हैं। इस बार कार्रवाई यूपी एटीएस ने की है। सात अगस्त को लखनऊ में गिरफ्तार किए गए दोनों युवकों के कब्जे से 500 रुपये के 201 हाई क्वालिटी के संदिग्ध नकली नोट बरामद हुए हैं।
एटीएस ने गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर निवासी अजीम खान पुत्र मुजीम खान और राजा उर्फ समीमुल पुत्र स्व. अहमद हसन को गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से 500-500 रुपये के 201 नोट बरामद हुए, जिनकी अंकित कीमत 1,00,500 रुपये है। एटीएस के मुताबिक बरामद नोट प्रथम दृष्टया हाई क्वालिटी के नकली प्रतीत हो रहे हैं। नोटों की वास्तविकता की पुष्टि के लिए इन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार तकनीकी जांच के लिए भेजा जा रहा है।
तीन माह पहले भी सामने आया था गणेशपुर का नाम
गणेशपुर गांव का नाम करीब तीन माह पहले भी नकली करेंसी के मामले में सामने आया था। उस समय अलीगढ़ पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गंजडुंडवारा क्षेत्र के गणेशपुर गांव निवासी जिकरूल हसन और उसके साथी बारिक को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी जिकरूल हसन के कब्जे से 6.20 लाख रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे।
पुराने मामले में पुलिस ने नकली नोटों की सप्लाई और उन्हें बाजार में खपाने वाले नेटवर्क की पड़ताल की थी। पूछताछ और जांच के दौरान नकली करेंसी के स्रोत तथा उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली गई थी।
मालदा और बांग्लादेश सीमा तक पहुंचे थे पुराने मामले के तार
पुलिस जांच के अनुसार पुराने मामले में नकली नोटों की सप्लाई के तार पश्चिम बंगाल के मालदा क्षेत्र और भारत-बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने की बात सामने आई थी। पूछताछ में नकली नोट आधी कीमत में हासिल करने और बाद में उन्हें बाजार में चलाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब वर्तमान मामले में यूपी एटीएस की जांच में भी भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश तक नकली भारतीय करेंसी पहुंचाए जाने की सूचना सामने आई है। दोनों मामलों में समानता जरूर नजर आ रही है, लेकिन पुराने मामले और वर्तमान एटीएस कार्रवाई के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच एजेंसी की ओर से नहीं की गई है।
एक ही गांव से दो मामले, नेटवर्क को लेकर बढ़े सवाल
पुराने मामले में गणेशपुर निवासी जिकरूल हसन और बारिक की गिरफ्तारी तथा अब इसी गांव के अजीम खान और राजा उर्फ समीमुल की एटीएस द्वारा गिरफ्तारी से नकली करेंसी के संभावित नेटवर्क को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वर्तमान मामले के दोनों आरोपियों का पुराने मामले से कोई संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वर्तमान मामले में बरामद नकली नोट कहां से आए, पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश तक इन्हें किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाया गया और आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नकली करेंसी को आगे किन इलाकों में खपाने की तैयारी थी और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।