Friday, September 11, 2026

Kasganj:हुनर सीखने निकले थे, संगत ऐसी मिली कि कहानी बदल गई... गणेशपुर के भटकते युवाओं को लेकर ग्रामीणो की बढ़ी चिंता

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: August 9, 2026

Kasganj:हुनर सीखने निकले थे, संगत ऐसी मिली कि कहानी बदल गई... गणेशपुर के भटकते युवाओं को लेकर ग्रामीणो की बढ़ी चिंता

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

हर युवा बेहतर भविष्य का सपना लेकर घर से निकलता है। कोई पढ़ाई के लिए शहर जाता है तो कोई हुनर सीखकर परिवार का सहारा बनने की उम्मीद में। गंजडुंडवारा क्षेत्र के गणेशपुर गांव के अजीम खान और राजा उर्फ शमीमुल भी कुछ इसी उम्मीद के साथ दिल्ली गए थे। मकसद था सिलाई का काम सीखना और मेहनत से अपनी जिंदगी संवारना, लेकिन अब दोनों नकली करेंसी के गंभीर मामले में यूपी एटीएस की गिरफ्त में हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद गांव में नकली नोटों के नेटवर्क से ज्यादा युवाओं के गलत संगत में पड़कर भटकने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

यूपी एटीएस ने सात अगस्त को दोनों को लखनऊ से गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 500-500 रुपये के 201 संदिग्ध हाई क्वालिटी नकली नोट बरामद हुए, जिनकी अंकित कीमत 1,00,500 रुपये बताई गई है। एटीएस के मुताबिक नोट प्रथम दृष्टया हाई क्वालिटी के नकली प्रतीत हो रहे हैं। इनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है।

सिलाई का हुनर सीखने पहुंचे थे दिल्ली

बताया गया है कि अजीम खान और राजा उर्फ शमीमुल दिल्ली में सिलाई का काम करते थे। दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं बताई जा रही है। शमीमुल के पिता अहमद हसन का हाल ही में निधन हुआ था। इसके बाद वह सिलाई का काम सीखने दिल्ली गया था, ताकि हुनर हासिल कर परिवार की जिम्मेदारी संभाल सके।

लेकिन दिल्ली में उसकी पहचान गणेशपुर के ही कुछ ऐसे लोगों से होने की बात सामने आई, जिनके नाम पहले नकली नोटों से जुड़े मामलों में आ चुके हैं। अब इसी संपर्क को लेकर जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं। हालांकि पुराने आरोपितों और वर्तमान मामले के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

वैसे गणेशपुर गांव का नाम नकली करेंसी के मामले में पहले भी सामने आ चुका है। करीब तीन माह पूर्व अलीगढ़ पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग की कार्रवाई में गांव निवासी जिकरूल हसन और उसके साथी बारिक को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी जिकरूल हसन के कब्जे से 6.20 लाख रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे।

पुराने मामले की जांच में नकली नोटों की सप्लाई के तार पश्चिम बंगाल के मालदा क्षेत्र और भारत-बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने की बात सामने आई थी। पूछताछ में नकली नोट आधी कीमत में हासिल करने और उन्हें बाजार में खपाने की जानकारी भी पुलिस के सामने आने की बात कही गई थी।

पुराने संपर्कों से भटकने ने बढ़ाई चिंता

गांव में चर्चा है कि पुराने मामले से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के बाद कुछ अन्य युवाओं के भी रास्ता भटकने की आशंका है। जिकरूल और बारिक की दोस्ती और उनके पुराने मामले की चर्चा के बीच अब अजीम और शमीमुल की गिरफ्तारी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक परेशानियों के कारण युवा रोजगार और हुनर सीखने के लिए दिल्ली, नोएडा और दूसरे शहरों में जाते हैं। वहां उन्हें सही मार्गदर्शन और अच्छा माहौल मिले तो वे परिवार और समाज के लिए मजबूत आधार बन सकते हैं, लेकिन गलत संगत और आसान कमाई का लालच उन्हें अपराध की तरफ धकेल सकता है।

दोस्त बदले तो जिंदगी की दिशा भी बदल गई

युवाओं की जिंदगी में संगत का असर कितना गहरा होता है, गणेशपुर का यह मामला उसी ओर इशारा करता नजर आ रहा है। हालांकि वर्तमान आरोपितों की वास्तविक भूमिका और उनके संपर्कों की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन गांव में इस बात को लेकर चिंता है कि कहीं कुछ युवा जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपना भविष्य ही दांव पर न लगा दें।

ग्रामीणो का कहना हें एक तरफ परिवार अपने बच्चों को हुनर सीखने और कमाने के लिए बड़े शहरों में भेजते हैं, दूसरी तरफ गलत संगत का एक संपर्क उनकी पूरी दिशा बदल सकता है। अगर सिलाई की मशीन पर बैठकर भविष्य सीने का सपना देखने वाला युवा यदि अपराध के जाल में उलझ जाए तो नुकसान केवल उसका नहीं, पूरे परिवार का होता है।

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