खेतों में पानी, तीन पुलियां कटीं, नाव बनी रास्ता; राहत सामग्री वितरण के बीच ग्रामीणों का बड़ा सवाल-बांध कब बनेगा, ताकि हर साल राहत सामग्री बांटने की न आए नौबत
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
विगत दिनों गंगा का पानी बढ़ा तो पटियाली क्षेत्र के तटीय गांवो की मुश्किलें भी बढ़ गईं। खेत जलमग्न हो गए, रास्तों पर पानी बह रहा है और तीन पुलियां कट जाने से आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों को कई जगह नाव के सहारे रास्ता पार करना पड़ रहा है। इसी बीच सोमवार को भाजपा जिलाध्यक्ष नीरज शर्मा पार्टी पदाधिकारी के साथ मूंजखेड़ा गांव पहुंचे। बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया गया और प्रशासनिक अधिकारियों एवं पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी में प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई। इस दौरान एसडीएम आतिश कुमार सिंह, तहसीलदार राम नयन सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
दौरे के दौरान कहा गया कि “इस मुश्किल घड़ी में बाढ़ से प्रभावित अपने भाइयों-बहनों और परिवारों के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं।”
राहत सामग्री से प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद जरूर मिली, लेकिन गांव के हालात के बीच एक सवाल फिर जोर पकड़ रहा है, क्या हर साल गंगा बढ़ेगी, खेत डूबेंगे, राहत सामग्री बांटी जाएगी और पानी उतरने के बाद समस्या भी पानी के साथ बह जाएगी।
साहब, राहत तो मिल गई... अब बांध कब मिलेगा
मूंजखेड़ा समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण लंबे समय से नगला हंसी से राजेपुर कुर्रा तक स्थायी बांध की मांग करते आ रहे हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ते ही खेतों में पानी पहुंच जाता है और इस बार भी सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलभराव की चपेट में है। तीन स्थानों पर पुलियां कट चुकी हैं। सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित है और प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था की गई है।
नाव ने फिलहाल रास्ते की समस्या कुछ हद तक संभाल ली है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि नाव राहत दे सकती है, बाढ़ रोक नहीं सकती।उनकी उम्मीद है कि इस बार राहत सामग्री बांटने के साथ स्थायी बांध की मांग को भी आगे बढ़ाया जाएगा। क्योंकि राशन की किट कुछ दिनों का सहारा है, लेकिन बांध वर्षों की सुरक्षा दे सकता है।
हर साल बाढ़, हर साल राहत... कहानी वही
मूंजखेड़ा के ग्रामीणों के लिए बाढ़ का यह संकट नया नहीं है। बरसात आती है, गंगा का जलस्तर बढ़ता है, खेत डूबते हैं, रास्ते कटते हैं और फिर राहत एवं बचाव का दौर शुरू हो जाता है। कुछ दिन बाद पानी घटता है। जिंदगी वापस पटरी पर आती है और बाढ़ का संकट जैसे फाइलों के पन्नों में दब जाता है। फिर अगली बरसात आती है और कहानी दोबारा शुरू हो जाती है। फर्क सिर्फ इतना रहता है कि तारीख बदल जाती है, पानी का स्तर बदल जाता है और राहत सामग्री के पैकेट बदल जाते हैं—लेकिन ग्रामीणों की समस्या वही रहती है।
दौरा हुआ, राहत मिली... अब स्थायी समाधान की बारी
बाढ़ प्रभावित गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना तत्काल राहत की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन ग्रामीणों की असली जरूरत इससे कहीं आगे की है। वे चाहते हैं कि खेत हर साल न डूबें, पुलियां हर साल न कटें और बच्चों, महिलाओं तथा बुजुर्गों को बरसात में नाव के सहारे रास्ता पार न करना पड़े।
इसीलिए ग्रामीणों की मांग है कि नगला हंसी से राजेपुर कुर्रा तक स्थायी बांध का निर्माण कराया जाए और क्षतिग्रस्त पुलियों का स्थायी समाधान किया जाए।
नेताओं की मौजूदगी अच्छी, लेकिन पानी उतरने के बाद भी याद रहे गांव
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि संकट के समय गांव पहुंचना अच्छी बात है, लेकिन संकट खत्म होने के बाद भी गांव की याद बनी रहनी चाहिए।बाढ़ के दौरान गांव पहुंचकर स्थिति देखना, राहत सामग्री बांटना और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना जरूरी है। लेकिन ग्रामीण चाहते हैं कि पानी उतरने के बाद भी यही सक्रियता बनी रहे।
पटियाली विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों की अपेक्षा है कि वर्षों पुरानी बांध की मांग को लेकर प्रशासन और शासन स्तर पर ठोस पहल हो। राहत की फोटो आज है, लेकिन बांध की जरूरत कल भी रहेगी।
ताजा जलस्तर रिपोर्ट ने दी राहत, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं
10 अगस्त 2026 की जलस्तर रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार डाउनस्ट्रीम में गंगा का डिस्चार्ज 89,154 क्यूसेक दर्ज किया गया। बिजनौर डाउनस्ट्रीम में डिस्चार्ज 97,717 क्यूसेक रहा। नरोरा डाउनस्ट्रीम में जलस्तर 178.32 मीटर दर्ज किया गया, जबकि वहां डिस्चार्ज 1,53,173 क्यूसेक रहा। कछला पुल के सीडब्ल्यूसी गेज पर जलस्तर 162.32 मीटर दर्ज किया गया।
कासगंज में सोमवार को बारिश 00 मिमी रही, जबकि अगस्त माह में अब तक कुल 92 मिमी बारिश दर्ज की गई है। नरोरा में भी सोमवार को बारिश 00 मिमी रही।
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल गंगा का ट्रेंड गिरावट की ओर है। जलस्तर में गिरावट ग्रामीणों के लिए राहत की खबर है, लेकिन पहले से भरे खेतों, कट चुकी पुलियों और प्रभावित फसलों की परेशानी अभी बनी हुई है।
पानी घटेगा, राहत मिलेगी... लेकिन सवाल फिर सामने आएगा
गंगा का पानी धीरे-धीरे घटेगा तो ग्रामीणों को राहत मिलेगी। रास्ते खुलेंगे, खेतों से पानी कम होगा और नाव की जरूरत भी घट सकती है।लेकिन पानी उतरने के बाद सबसे बड़ा सवाल फिर सामने होगा, क्या इस बार बाढ़ के साथ सिर्फ पानी उतरेगा या स्थायी समाधान की उम्मीद भी जमीन पर उतरेगी।
फिलहाल गंगा का पानी घटने की खबर राहत दे रही है, मगर ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि इस बार राहत सामग्री के साथ क्या उनके हिस्से में स्थायी समाधान भी आएगा, या अगले साल फिर गंगा बढ़ेगी, गांव डूबेगा और राहत के पैकेट लेकर वही सवाल सामने खड़ा होगा।