बाढ़ मे डूबे गांवो के ग्रामीणों की शासन से गुहार,पक्का बांध बनाकर हर साल की त्रासदी से दिलाएं स्थायी निजात
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
स्वतंत्रता दिवस का पर्व देशभर में जहां उल्लास और देशभक्ति के साथ मनाया गया, वहीं पटियाली विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त ग्राम मूंजखेड़ा में आजादी का जश्न एक अलग ही भाव लिए नजर आया। चारों ओर बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीणों के बीच जब तिरंगा शान से लहराया तो वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो उठा, लेकिन इसी के साथ ग्रामीणों के दिल में वर्षों से पल रहा एक दर्द भी सामने आया, बाढ़ से स्थायी मुक्ति का दर्द।
पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मूंजखेड़ा गांव में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाढ़ की विषम परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों और बच्चों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। तिरंगे के सामने खड़े बच्चों के चेहरों पर देशभक्ति का उत्साह था, लेकिन उनके गांव की परिस्थितियां आज भी कई सवाल खड़े कर रही थीं।
ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंज उठा। इसके बाद ग्रामीणों और बच्चों को मिष्ठान वितरित किया गया। ग्रामीणों के लिए यह केवल स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला बनाए रखने और अपने गांव के बेहतर भविष्य की उम्मीद को जिंदा रखने का अवसर था।
तिरंगे के नीचे उठी पक्के बांध की मांग
कार्यक्रम के दौरान शासन से क्षेत्र में पक्के बांध का निर्माण कराने की मांग उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आने पर गांवों के लोगों को परेशानी, आवागमन की समस्या, जलभराव और रोजमर्रा की जिंदगी में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बाढ़ का पानी उतर जाता है, लेकिन अपने पीछे ग्रामीणों के लिए परेशानी और अगली बाढ़ की चिंता छोड़ जाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि बाढ़ की समस्या का अस्थायी समाधान करने के बजाय अब स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया जाए। क्षेत्र में मजबूत और पक्के बांध का निर्माण कराया जाए, जिससे गंगा की बाढ़ से प्रभावित गांवों को हर वर्ष होने वाली तबाही और परेशानी से राहत मिल सके।
आजादी का पर्व, लेकिन बाढ़ से आजादी का इंतजार
मूंजखेड़ा में स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन एक मार्मिक संदेश भी दे गया। देश को आजाद हुए दशकों बीत गए, लेकिन बाढ़ग्रस्त गांवों के लोग आज भी हर वर्ष पानी के प्रकोप से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बच्चों के हाथों में तिरंगा था और आंखों में उज्ज्वल भविष्य के सपने, मगर उनके गांव की तस्वीर यह सवाल पूछ रही थी कि आखिर उन्हें हर साल बाढ़ की समस्या से स्थायी आजादी कब मिलेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार यदि क्षेत्र में पक्के बांध का निर्माण करा दे तो यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं होगा, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए सुरक्षा की मजबूत दीवार साबित होगा। इससे खेती, आवागमन, पशुपालन और बच्चों की पढ़ाई सहित ग्रामीण जीवन से जुड़ी अनेक समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकेगा।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य शाहरुख राज, लोहिया वाहिनी के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सूर्यवंशी, उर्वेश यादव, प्रदीप यादव, आशीष यादव, अभिषेक, अरमान सिंह, अशोक, केपी सिंह, रमनेश, ओसान सिंह, रवि, जयवीर, रुकूम सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
मूंजखेड़ा में स्वतंत्रता दिवस पर फहराया गया तिरंगा जहां देश की आजादी का प्रतीक बना, वहीं पक्के बांध की उठी मांग इस बात की गवाही देती रही कि बाढ़ग्रस्त गांवों के लोग अब हर वर्ष की मजबूरी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं।