14 वर्षीय पोते को अपने से दूर नहीं करना चाहते थे 67 वर्षीय दादा, एक माह पहले हॉस्टल से घर ले आए थे; संपत्ति का हिस्सा भी पोते के नाम किया, पुलिस की समझाइश के बाद भी नहीं खोला गेट
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
दादा-पोते के रिश्ते में स्नेह की एक ऐसी तस्वीर मंगलवार को कासगंज में सामने आई, जिसने पुलिस और आसपास के लोगों को भी घंटों उलझाए रखा। सहावर गेट लाइन पार राजपूत डेंटल वाली गली में 67 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी बाबूराम राजपूत अपने 14 वर्षीय पोते दिग्विजय सिंह को अपने से दूर करने को तैयार नहीं हुए। जयपुर से पिता अविनाश बेटे को लेने पहुंचे तो बाबूराम पोते को लेकर मकान के एक कमरे में अंदर से बंद हो गए। सूचना पर पुलिस पहुंची और कई घंटे तक दरवाजा खुलवाने की कोशिश करती रही।
वर्ष 2019 में पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए बाबूराम का अपने पोते दिग्विजय से गहरा लगाव बताया जा रहा है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि दिग्विजय फर्रुखाबाद स्थित सीपी इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल में रहकर कक्षा आठ की पढ़ाई कर रहा था। करीब एक माह पहले बाबूराम उसे हॉस्टल से अपने घर कासगंज ले आए थे। इसके बाद से पोता उनके साथ ही रह रहा था।
मंगलवार सुबह दिग्विजय के पिता अविनाश राजपूत अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के साथ जयपुर से कासगंज पहुंचे। बताया गया कि उन्हें देखकर बाबूराम ने मकान का गेट अंदर से बंद कर लिया और पोते को लेकर कमरे में चले गए। इसी दौरान पीआरवी पर पिता और दादा की ओर से अलग-अलग सूचनाएं दी गईं। अविनाश ने बताया कि उसके पिता उसे बेटे से बात नहीं करने दे रहे हैं, जबकि बाबूराम ने अपने बेटे से जान का खतरा बताया।
सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। खिड़की के माध्यम से बाबूराम से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वह दिग्विजय को जयपुर नहीं जाने देना चाहते। परिचित उमेश शर्मा के माध्यम से भी उन्हें समझाया गया, लेकिन बाबूराम ने बाहर मौजूद लोगों को हटने के लिए कहा और भरोसा दिलाया कि उनके चले जाने पर वह स्वयं बाहर आ जाएंगे।
पोते के नाम संपत्ति का हिस्सा भी किया
पुलिस के अनुसार बाबूराम अपने पोते से बेहद स्नेह करते हैं। यही वजह बताई गई कि उन्होंने दिग्विजय के नाम अपने मकान और अन्य संपत्ति का कुछ हिस्सा भी जीवित रहते हस्तांतरित किया है। पत्नी सुशीला देवी की वर्ष 2021 में कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है। बड़े बेटे राजेश की वर्ष 2009 में सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार की परिस्थितियों में दिग्विजय बाबूराम के बेहद करीब हो गया।
पिता ने चैट पर पूछा- बेटा ठीक है
मकान के अंदर दादा के साथ मौजूद दिग्विजय से उसके पिता ने व्हाट्सएप चैट के जरिए संपर्क किया। पुलिस के मुताबिक दिग्विजय ने मैसेज कर बताया कि वह पूरी तरह ठीक है और उसे दादा से किसी तरह का खतरा नहीं है। इस संदेश के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली, लेकिन कमरे का गेट फिर भी नहीं खुला।
परिजनों के अनुसार दिग्विजय को करीब एक माह पहले हॉस्टल से कासगंज लाने की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। वहीं पुलिस की पूछताछ में बाबूराम के पोते के प्रति गहरे लगाव की बात सामने आई है। ऐसे में मामला केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि दादा-पोते के भावनात्मक रिश्ते से भी जुड़ा दिखाई दे रहा है।
शाम तक गेट खुलने का इंतजार
पुलिस ने एहतियात के तौर पर मकान के सामने सादे कपड़ों में दो पुलिसकर्मियों समेत आसपास छह पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। एसडीएम और सीओ सदर भी मौके पर पहुंचे और स्थिति पर नजर रखी। पड़ोसियों के अनुसार बाबूराम प्रतिदिन शाम करीब 7:30 बजे मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं। पुलिस उसी दौरान स्थिति सामान्य होने और गेट खुलने की उम्मीद में निगरानी कर रही है।
मौके पर फिलहाल शांति बनी हुई है। पुलिस लगातार बातचीत के जरिए बाबूराम को समझाने और गेट खुलवाने के प्रयास में जुटी है। कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र का कहना है, कि परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।