मंगलवार सुबह जयपुर से पिता लेने पहुंचा तो पोते को लेकर कमरे में बंद हो गया था दादा
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद मे दादा-पोते के रिश्ते की ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने करीब 20 घंटे तक पुलिस को भी उलझाए रखा। पोते से गहरे लगाव के चलते 67 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी बाबूराम राजपूत अपने 14 वर्षीय पोते दिग्विजय सिंह को लेकर मकान के एक कमरे में बंद हो गए। बाहर पुलिस और परिवार के लोग उन्हें समझाते रहे, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। आखिर बुधवार तड़के करीब 4:30 बजे दरवाजा खुला तो दादा-पोता दोनों बाहर आए। इसके बाद पोते ने दादा के साथ रहने की इच्छा जताई।
मामला कोतवाली कासगंज के सहावर गेट पावसरा स्थित राजपूत डेंटल वाली गली का है। मंगलवार सुबह दिग्विजय के पिता अविनाश राजपूत अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के साथ जयपुर से कासगंज पहुंचे थे। वह अपने बेटे को साथ ले जाने के लिए आए थे। पिता के पहुंचते ही बाबूराम ने मकान का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और पोते को लेकर कमरे में चले गए।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो काफी देर तक दरवाजा खुलवाने और बाबूराम को समझाने का प्रयास किया गया। बाबूराम का कहना था कि वह अपने पोते को जयपुर नहीं जाने देना चाहते। पुलिस के अनुसार, उन्हें आशंका थी कि उनका बेटा दिग्विजय को अपने साथ ले जाएगा।
दादा के लिए पोता ही बन गया भावनात्मक सहारा
बाबूराम वर्ष 2019 में पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पत्नी सुशीला देवी की वर्ष 2021 में कोरोना संक्रमण के दौरान मौत हो गई थी। बड़े बेटे राजेश कुमार की वर्ष 2009 में सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। पारिवारिक परिस्थितियों के बीच दिग्विजय का अपने दादा से बेहद गहरा लगाव हो गया।
दिग्विजय फर्रुखाबाद स्थित सीपी इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल में रहकर कक्षा आठ में पढ़ाई कर रहा था। करीब एक माह पहले बाबूराम उसे हॉस्टल से अपने घर पावसरा ले आए थे। इसके बाद से वह दादा के साथ रह रहा था। पुलिस के अनुसार, बाबूराम ने दिग्विजय के नाम अपने मकान और अन्य संपत्ति का कुछ हिस्सा भी जीवित रहते हस्तांतरित किया है।
एसपी भी पहुंचे, पड़ोसियों से ली जानकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। पुलिस अधिकारियों ने लगातार बाबूराम से बातचीत कर गेट खोलने की अपील की। उनके परिचित उमेश शर्मा के माध्यम से भी उन्हें समझाने का प्रयास किया गया।
मामले की जानकारी पर एसपी कासगंज ओम प्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी बाबूराम से बातचीत कर उन्हें समझाने और बाहर आने का प्रयास किया। पुलिस ने आसपास के पड़ोसियों से भी घटना के संबंध में जानकारी जुटाई, ताकि परिवार के बीच चल रहे विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद बाबूराम ने रात तक गेट नहीं खोला।
व्हाट्सएप पर पिता से बात, बोला- दादा से कोई खतरा नहीं
इस बीच दिग्विजय के पिता अविनाश ने व्हाट्सएप चैट के जरिए अपने बेटे से संपर्क किया। पुलिस के अनुसार, दिग्विजय ने मैसेज के माध्यम से बताया कि वह ठीक है और उसे अपने दादा से किसी प्रकार का खतरा नहीं है। इससे बाहर मौजूद पुलिस और परिजनों को राहत मिली, लेकिन बाबूराम पोते को जयपुर भेजने के लिए तैयार नहीं हुए।
रातभर पुलिसकर्मी मकान के आसपास तैनात रहे और बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य रखने का प्रयास करते रहे। अधिकारी भी लगातार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे।
दरवाजा खुला तो पोते ने जताई दादा के साथ रहने की इच्छा
करीब 20 घंटे बाद बुधवार सुबह 4:30 बजे पुलिसकर्मियों की लगातार समझाइश के बाद बाबूराम ने मकान का दरवाजा खोल दिया। दादा-पोता दोनों बाहर आए तो पुलिस ने सबसे पहले दिग्विजय की स्थिति जानी। पुलिस के अनुसार वह स्वस्थ और सुरक्षित मिला।
बाहर आने के बाद दिग्विजय ने अपने दादा के साथ रहने की इच्छा जताई। उसके इस कथन ने पूरे घटनाक्रम को एक अलग भावनात्मक रंग दे दिया। जिस पोते को अपने से दूर जाने के डर से दादा ने करीब 20 घंटे तक कमरे में अपने पास रखा, दरवाजा खुलने के बाद वही पोता दादा के साथ रहने की बात कहता नजर आया।
पुलिस दोनों को कोतवाली लेकर पहुंची है, जहां मामले में अग्रेतर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।