छह गांव बाढ़ की चपेट में, 24 घंटे नावों का सहारा; राहत के साथ स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और संक्रमण रोकथाम में जुटा प्रशासन
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंगा के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी ने पटियाली तहसील के तटीय गांवों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पानी बढ़ने के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों में जिंदगी अब राहत सामग्री के सहारे आगे बढ़ रही है। कहीं घरों तक पहुंचने के रास्ते पानी में डूबे हैं तो कहीं पशुधन और रोजमर्रा की जरूरतों को सुरक्षित रखना ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे हालात में प्रशासन की ओर से पहुंचाई जा रही राशन किट, स्वास्थ्य सेवाएं, पशु चिकित्सा और 24 घंटे संचालित नावें ग्रामीणों के लिए बड़ा सहारा बनी हुई हैं। वर्तमान में मूंजखेड़ा, नगला दुर्जन, नगला नरपत, नगला खना, नगला पदम और नगला जयकिशन बाढ़ से प्रभावित हैं।
गंगा का पानी बढ़ने के साथ ग्रामीणों को एक बार फिर वही डर सताने लगा है कि कहीं जलस्तर बढ़ने के साथ कटान और जलभराव भी तेज न हो जाए। कई स्थानों पर रास्ते पानी में डूबने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ और ग्रामीणों को नावों का सहारा लेना पड़ा। बाढ़ की इस बार-बार लौटती समस्या से स्थायी निजात के लिए ग्रामीण लंबे समय से स्थायी बांध की मांग करते आ रहे हैं।
बाढ़ ने इन गांवों में जिंदगी की रफ्तार जरूर धीमी कर दी है, लेकिन लोगों की उम्मीद अभी कायम है। प्रभावित परिवारों तक प्रशासन की ओर से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। अब तक 709 राशन किट वितरित की जा चुकी हैं। इन राशन किट के सहारे बाढ़ प्रभावित परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। पानी से घिरे गांवों में राहत सामग्री पहुंचाना भी अपने आप में चुनौती है, लेकिन प्रशासन की ओर से नावों के जरिए आवागमन और राहत पहुंचाने की व्यवस्था जारी रखी गई है।
बाढ़ के बीच बच्चों का पढ़ाई के प्रति जज्बा भी ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीर सामने लाता है। रास्ते जलमग्न होने के बावजूद कई बच्चे नावों के सहारे स्कूल पहुंचते रहे हैं। पानी के बीच बिना पर्याप्त सुरक्षा साधनों के बच्चों का आवागमन चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के लिए बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही के साथ पशुओं को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती है।
पशुधन को बचाने के लिए पशुपालन विभाग भी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय है। अब तक 2,025 पशुओं का टीकाकरण और 503 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार के लिए 24 शिविर लगाए गए हैं। शनिवार को नगला पदम, राजेपुर कुर्रा, नगला हंसी और मूंजखेड़ा में पशु शिविर आयोजित किए गए। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए पशुधन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुओं पर निर्भर है।
बाढ़ के पानी के साथ मच्छरों और जलजनित संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से 17 गांवों में छिड़काव कराया जा चुका है। शनिवार को मूंजखेड़ा और उलई खेड़ा में भी छिड़काव कराया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी प्रभावित गांवों में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। अब तक 31 स्वास्थ्य शिविरों में 1,752 लोगों का उपचार किया जा चुका है। शनिवार को कादरगंज खाम, नौली फतुआबाद, नरदौली पुख्ता और पीतम नगर में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। ग्रामीणों को 117 ओआरएस पैकेट और 685 क्लोरीन टैबलेट भी वितरित की गईं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों का संचालन 24 घंटे किया जा रहा है। पानी के बीच यही नावें ग्रामीणों के लिए रास्ता भी हैं और जरूरत पड़ने पर बचाव का साधन भी। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके और राहत सामग्री एवं आवश्यक सेवाएं प्रभावित गांवों तक पहुंचती रहें।
जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का प्रतिदिन स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने तथा राशन, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं समय से उपलब्ध कराने को कहा है। अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा का बढ़ता जलस्तर भले ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा हो, लेकिन प्रशासन की राहत व्यवस्था ने मुश्किल समय में उन्हें कुछ सहारा दिया है। मूंजखेड़ा से नगला जयकिशन और नगला खना से नगला दुर्जन तक बाढ़ की मार झेल रहे परिवार फिलहाल राहत सामग्री, नावों और प्रशासनिक मदद के सहारे जिंदगी आगे बढ़ा रहे हैं। किसी के लिए राशन की किट उम्मीद है, किसी के लिए नाव सुरक्षित रास्ता और किसी के लिए स्वास्थ्य शिविर बीमारी के बीच राहत का भरोसा। ग्रामीणों की निगाह अब गंगा के जलस्तर पर टिकी है और उम्मीद है कि पानी जल्द थमेगा, रास्ते खुलेंगे और बाढ़ के साये में चल रही जिंदगी फिर सामान्य पटरी पर लौट सकेगी।