जागरण टुडे, बरेली।
अग्निवीर भर्ती के री-मेडिकल में अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर रुपये ऐंठने वाले गिरोह का बरेली में खुलासा हुआ है। मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर कैंट पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बताकर अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी मोहर, मोबाइल फोन और अभ्यर्थियों की जानकारी वाला रजिस्टर बरामद किया है। गिरोह का एक अन्य आरोपी फरार है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी राजेश तिवारी निवासी मुबारकपुर, लखनऊ है। वह अग्निवीर जनरल ड्यूटी के री-मेडिकल में फेल होने वाले अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देता था। इसके लिए वह खुद को सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बताकर अभ्यर्थियों से संपर्क करता और उनसे मोटी रकम की मांग करता था।
मिलिट्री अस्पताल के पास नए शिकार की तलाश
25 अगस्त को राजेश तिवारी मिलिट्री अस्पताल के पास पहुंचा था। वह री-मेडिकल में असफल अभ्यर्थियों की तलाश कर रहा था। इसी दौरान मिलिट्री इंटेलिजेंस को उसकी गतिविधियों की जानकारी मिली। सूचना पर कैंट पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर जीतता था भरोसा
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि आरोपी अभ्यर्थियों को विश्वास में लेने के लिए फर्जी कैंटीन पहचानपत्र, कूटरचित कॉल लेटर और रेफरल लेटर दिखाता था। वह अभ्यर्थियों से कहता था कि उनका आरएमडीएस नंबर सेना के अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है और री-मेडिकल में उन्हें पास करा दिया जाएगा। इसी भरोसे में अभ्यर्थी उसके झांसे में आ जाते थे।
मोबाइल में मिली 40 हजार रुपये की एंट्री
पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से कई अभ्यर्थियों के दस्तावेज, बैंक हिस्ट्री और वाट्सऐप चैट मिली हैं। जांच में 21 अगस्त को अंकित सिंह चौहान की यूपीआई आईडी से 40 हजार रुपये आरोपी को मिलने की पुष्टि हुई है। अंकित का नाम आरोपी के पास मिले रजिस्टर में भी दर्ज था। इससे पुलिस को ठगी के नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।
गजेंद्र को भेजता था अभ्यर्थियों की जानकारी
पुलिस की पूछताछ में राजेश ने बताया कि इस खेल में गजेंद्र सिंह भी शामिल था। अभ्यर्थियों की जानकारी वाट्सऐप के जरिए गजेंद्र को भेजी जाती थी। इसके बाद रकम का एक हिस्सा उसके बताए बैंक खाते में भेजा जाता था। गजेंद्र के फरार होने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने अब तक कितने अग्निवीर अभ्यर्थियों को निशाना बनाया और उनसे कितनी रकम वसूली गई।