बरौना में सिंचाई विभाग के पक्के बांध की गुणवत्ता पर सवाल, समाजसेवी अब्दुल हफीज गांधी ने निर्माण सामग्री और नींव की जांच की मांग
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा ब्लॉक के ग्राम बरौना में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही सिंचाई विभाग के हालिया निर्माण की मजबूती सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 350 मीटर लंबे पक्के बांध की सात ठोकरों में से तीन के नीचे की ओर झुकने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में चिंता है। सवाल यह है कि जिस निर्माण का उद्देश्य गंगा के कटान और बाढ़ के दबाव से गांव को सुरक्षा देना था, वह पानी बढ़ते ही दबाव में क्यों आने लगा।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बरौना में बाढ़ और कटान रोकने के नाम पर पिछले कई वर्षों से अलग-अलग कार्यों पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। पहले कच्चे कार्य और जियो-ट्यूब के जरिए कटान रोकने के प्रयास किए गए और अब पक्का बांध बनाया गया है। इसके बावजूद गंगा का जलस्तर बढ़ते ही ठोकरों का झुकना निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती की जांच की जरूरत को सामने लाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठोकरों की मजबूती के लिए नींव और फाउंडेशन का मजबूत होना सबसे महत्वपूर्ण है। आरोप है कि नींव में रेत की बोरियों के स्थान पर मशीन के माध्यम से ढीली रेत डाली गई। यदि ऐसा हुआ है और पानी के दबाव में नींव की रेत बह गई तो ऊपर रखे बोल्डरों और पत्थरों का खिसकना या झुकना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बोल्डरों को लोहे के तार से पर्याप्त मजबूती से नहीं बांधा गया।
तीन ठोकरें झुक गईं तो सवाल उठना लाजिमी
अब्दुल हफीज गांधी ने कहा कि गंगा में पानी बढ़ते ही सात में से तीन ठोकरों का नीचे की ओर झुकना सामान्य बात नहीं है। यह महज पत्थरों के खिसकने का मामला नहीं, बल्कि उस निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल है जिस पर ग्रामीणों की सुरक्षा निर्भर है। यदि जलस्तर और बढ़ा तो कमजोर ठोकरों के और क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि बरौना में पिछले कई वर्षों से कटान रोकने के नाम पर काम कराया जा रहा है। हर बार सरकारी धन खर्च होने के बावजूद यदि बरसात और गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो जाते हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आखिर निर्माण में कितना धन खर्च हुआ, किस गुणवत्ता की सामग्री लगाई गई और काम किस तकनीकी मानक के आधार पर कराया गया—इन सभी सवालों का जवाब सामने आना चाहिए।
तकनीकी टीम से जांच कराने की मांग
उन्होंने जिलाधिकारी प्रणय सिंह और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्चस्तरीय तकनीकी टीम भेजकर पूरे 350 मीटर के बांध और सभी सात ठोकरों की जांच कराई जाए। निर्माण की नींव की गहराई, फाउंडेशन की संरचना, बोल्डरों की गुणवत्ता, इस्तेमाल किए गए तार, निर्माण सामग्री, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जांच में यदि निर्माण में मानकों की अनदेखी, घटिया सामग्री अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा सरकारी धन की रिकवरी भी कराई जाए।
उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि गंगा का जलस्तर और बढ़ने से पहले झुकी हुई ठोकरों की तत्काल तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था कराई जाए, ताकि किसी बड़े नुकसान से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के नाम पर खर्च होने वाला सरकारी धन ऐसा निर्माण खड़ा करने में लगना चाहिए जो गंगा के तेज बहाव और पानी के दबाव को झेल सके।
इस दौरान सदन प्रकाश गुप्ता, मेघ सिंह शाक्य, हरिओम शाक्य, गिरीश दिवाकर, रविंद्र राठौर, परमानंद शाक्य, रामपूत दिवाकर, नवी हसन और महिपाल शाक्य आदि मौजूद रहे।