जागरण टुडे, मथुरा।
ब्रज वैभव अभियान के तहत हार्टफुलनेस जन्मभूमि आश्रम में दो दिवसीय आवासीय कार्यक्रम ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी आंतरिक स्थिति को समझने और उसके संदेश को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने किया। उन्होंने ‘ब्रज वैभव अभियान एवं श्रीमद्भगवद्गीता’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए ब्रज की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उसके समय था।
उन्होंने गुरुतत्व पर भी अपने विचार साझा किए। साथ ही उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के गठन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से तीर्थ स्थलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
उद्घाटन सत्र में ग्लोबल हार्टफुलनेस गाइड कमलेश डी. पटेल (दाजी) द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण किया गया। ब्रज वैभव अभियान के मथुरा समन्वयक निशांत शर्मा ने विभिन्न स्थानों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘अंतःस्थिति के दर्पण के रूप में श्लोक’ रहा। सत्रों में प्रतिभागियों को गीता के श्लोकों के माध्यम से अपने विचारों और आंतरिक स्थिति को समझने का अभ्यास कराया गया। दो दिनों के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय, स्वधर्म, त्रिगुणात्मक प्रकृति, स्थितप्रज्ञ, त्याग और भक्ति जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही हार्टफुलनेस ध्यान और चिंतनपरक अभ्यास भी कराए गए।
कार्यक्रम का मार्गदर्शन हार्टफुलनेस गीतोपदेश टीम के ऋषि रंजन, गोरख पारुलकर, कृष्णा सचदेवा और रामकृष्ण द्विवेदी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि गीता का ज्ञान केवल पढ़ने और समझने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे व्यक्ति के जीवन, संबंधों, कर्तव्यों और आंतरिक विकास में अनुभव किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ब्रज वैभव अभियान ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सामने लाने के साथ भारतीय ज्ञान-परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का भी प्रयास है।