पांच साल से बदहाल बरौना की राह, स्कूल के सामने कीचड़ में बचपन; बाढ़ के वक्त राहत-बचाव भी हो सकता है प्रभावित
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कासगंज। गंजडुंडवारा ब्लॉक के ग्राम बरौना में बरी बगवास से गांव तक जाने वाली करीब ढाई से तीन किलोमीटर लंबी PWD की सड़क बरसात में सड़क कम और दलदल ज्यादा नजर आती है। जगह-जगह कीचड़ और जलभराव ने ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल कर दिया है। सबसे भयावह तस्वीर सरकारी विद्यालय के सामने दिखाई देती है, जहां वर्षों से जमा कीचड़ और गंदगी के बीच से नौनिहालों को स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। छोटे-छोटे कदम कब फिसल जाएं और कोई बच्चा चोटिल हो जाए, इसका खतरा हर समय बना रहता है।
बरौना की यह बदहाल सड़क केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की अनदेखी और ग्रामीणों की मजबूरी की कहानी बन चुकी है। बरसात में हालात ऐसे हो जाते हैं कि सड़क और आसपास के हिस्से में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण इसी रास्ते से निकलने को मजबूर हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए तो यह रोज की परीक्षा बन गई है।
समाजसेवी एवं सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एडवोकेट अब्दुल हफीज गांधी ने बताया कि बरौना पिछले करीब पांच वर्षों से बाढ़ के खतरे से जूझ रहा है। इस दौरान जिलाधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार, एडीएम, लेखपाल और सिंचाई विभाग के अधिकारी बांध एवं बाढ़ की स्थिति देखने गांव पहुंचते रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब अधिकारियों की नजरों के सामने ही यह रास्ता है, तो फिर पांच वर्षों से इसकी बदहाली क्यों नहीं दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय यही मार्ग गांव के लिए जीवनरेखा बन जाता है। एंबुलेंस, ट्रैक्टर, ट्रक, राहत सामग्री और जरूरी सामान इसी रास्ते से पहुंचता है। यदि सड़क इसी तरह दलदल बनी रही तो आपदा के समय राहत और बचाव कार्य प्रभावित होने का खतरा है। बांध की मजबूती जरूरी है, लेकिन बांध के पीछे बसे लोगों तक पहुंचने वाली सड़क को मजबूत रखना उससे कम जरूरी नहीं।
अब्दुल हफीज गांधी ने PWD और जिला प्रशासन से तत्काल सड़क का स्थलीय निरीक्षण कर युद्धस्तर पर मरम्मत कराने, विद्यालय के सामने जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करने तथा जलभराव वाले हिस्सों को ऊंचा और मजबूत कर आरसीसी सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को कीचड़ से होकर स्कूल जाने के लिए मजबूर करना किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि विकास की असली तस्वीर बड़े निर्माणों से नहीं, बल्कि उस रास्ते से दिखाई देती है जिस पर गांव का बच्चा स्कूल जाता है और जिस रास्ते से बाढ़ में मदद गांव तक पहुंचती है। बरौना को भाषण नहीं, सड़क चाहिए; निरीक्षण नहीं, समाधान चाहिए। अब प्रशासन को तय करना है कि बरौना की यह बदहाल राह कब तक दलदल बनी रहेगी।