Friday, September 11, 2026

मानपुर एसटीपी में रोज 18 एमएलडी सीवेज का शोधन, डीएम ने देखीं व्यवस्थाएं

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: September 2, 2026

मानपुर एसटीपी में रोज 18 एमएलडी सीवेज का शोधन, डीएम ने देखीं व्यवस्थाएं

जागरण टुडे, एटा

शहर के सीवर और नालों से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन की व्यवस्था परखने के लिए जिलाधिकारी अरविन्द सिंह बुधवार को ग्राम मानपुर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पहुंचे। 24 एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में वर्तमान में प्रतिदिन करीब 18 एमएलडी यानी 180 लाख लीटर सीवेज का शोधन किया जा रहा है।

डीएम ने प्लांट की विभिन्न तकनीकी इकाइयों का निरीक्षण कर सीवेज शोधन की प्रक्रिया, मशीनों की कार्यप्रणाली और शोधित पानी की गुणवत्ता की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट एसबीआर तकनीक पर आधारित है। शहर से सीवर गृह संयोजनों और नाला टैपिंग के माध्यम से प्लांट तक पहुंचने वाले गंदे पानी का शोधन किया जाता है। इसके बाद शोधित पानी को नाले के जरिए ईशन नदी में प्रवाहित किया जाता है।

प्रयोगशाला के रिकॉर्ड भी देखे

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्लांट की प्रयोगशाला में शोधित पानी की गुणवत्ता जांच से संबंधित रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शोधन के बाद पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

डीएम ने कहा कि प्लांट की सभी तकनीकी इकाइयों की नियमित जांच और रखरखाव कराया जाए। किसी भी स्तर पर तकनीकी खराबी के कारण सीवेज शोधन की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।

स्लज को जैविक खाद के रूप में उपयोग करने की पहल

निरीक्षण के दौरान डीएम ने सीवेज शोधन के बाद निकलने वाले अपशिष्ट, यानी स्लज के उपयोग की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक सावधानियों के साथ स्लज के जैविक खाद के रूप में उपयोग की जानकारी दी जाए। डीपीआरओ, कृषि विभाग और संबंधित विभागों को किसानों तक स्लज के उपयोग से जुड़ी तकनीकी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि उपयोग की निर्धारित प्रक्रिया और मानकों के प्रति किसानों को जागरूक करना जरूरी है।

स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़ी है परियोजना

जिलाधिकारी ने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट केवल गंदे पानी के शोधन की परियोजना नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शहर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से है। इसलिए इतनी महत्वपूर्ण परियोजना का संचालन पूरी क्षमता और प्रभावशीलता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्लांट में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आने पर उसका तत्काल समाधान कराया जाए, ताकि सीवेज शोधन की व्यवस्था बाधित न हो। निरीक्षण के दौरान जल निगम (नगरीय) के अधिशासी अभियंता सैयद तारिक अली समेत जल निगम के अधिकारी और संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे।

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