जागरण टुडे। ओसीएफ की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन शुरू होने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। वर्षों से रामलीला में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते आ रहे पुराने कलाकारों को इस बार मंचन से बाहर किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। कलाकारों ने इसे अपने साथ भेदभाव बताते हुए नाराजगी जताई है। वहीं, रामलीला कमेटी में सह-निदेशक की नियुक्ति को लेकर भी हिंदू संगठनों की ओर से विरोध सामने आया है।
पुराने कलाकारों का आरोप है कि इस बार उन्हें रामलीला के मंचन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं नहीं दी गईं। इनमें वर्षों से भगवान राम की भूमिका निभाने वाले रोहित सक्सेना, हनुमान का किरदार निभाने वाले मोहित कन्नौजिया, नारद की भूमिका निभाने वाले अरुण डीआर और परशुराम-विभीषण का पात्र निभाने वाले अरशद आजाद शामिल हैं। इसके अलावा शुभम सक्सेना और नागेश को भी मंचन से किनारे किए जाने की बात कही गई है।
कलाकारों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रामलीला में पूरी निष्ठा के साथ अपनी भूमिकाएं निभाईं। कई कलाकारों ने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई और दर्शकों के बीच उनकी भूमिकाओं को पसंद किया गया। ऐसे में अचानक मंचन से बाहर किए जाने से कलाकारों में असंतोष है। उन्होंने अपने संबंध में प्रकाशित खबरों को लेकर भी अपना पक्ष रखा और कहा कि उनके बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनका पक्ष भी जाना जाना चाहिए।
सह-निदेशक की नियुक्ति पर भी सवाल
रामलीला से जुड़े विवाद में सह-निदेशक की नियुक्ति भी चर्चा का विषय बन गई है। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के महासचिव एवं हिंदूवादी नेता राजेश अवस्थी ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि रामलीला धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में परंपराओं और भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
रामलीला का आयोजन ओसीएफ क्षेत्र में लंबे समय से होता आ रहा है। इसमें शहर के कलाकारों के साथ ही अलग-अलग वर्गों के लोग किसी न किसी रूप में जुड़ते रहे हैं। ऐसे में मंचन से पहले कलाकारों को लेकर उठे विवाद ने आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि रामलीला कमेटी पुराने कलाकारों की आपत्तियों और सह-निदेशक की नियुक्ति को लेकर उठे विरोध पर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल मंचन शुरू होने से पहले ही ओसीएफ की रामलीला चर्चा में आ गई है।