Friday, September 11, 2026

Kasganj: चारों ओर पानी, मच्छरों का डंक और अंधेरी रातें; बाढ़ ने छीन लिया ग्रामीणों का चैन

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: September 7, 2026

Kasganj: चारों ओर पानी, मच्छरों का डंक और अंधेरी रातें; बाढ़ ने छीन लिया ग्रामीणों का चैन

गंगा खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर, आंगन से चौके तक पहुंचा पानी;एंटी लार्वा छिडकाव बेअसर, फॉगिंग की उठी मांग

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

गंगा का पानी बढ़ रहा है और उसके साथ तटीय गांवों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी गहराती जा रही हैं। कहीं घरों के आंगन पानी में डूबे हैं तो कहीं बाढ़ का पानी चौके तक पहुंच गया है। जिन घरों में कभी चूल्हे जलते थे, वहां अब पानी से बचाने के लिए सामान को चारपाइयों और ऊंचे स्थानों पर रखने की जद्दोजहद चल रही है। बाहर निकलने के रास्ते डूबे हैं और भीतर पानी दस्तक दे रहा है। दिन पानी से संघर्ष में गुजर रहा है और रातें अंधेरे में कट रही हैं।


सोमवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर कछला ब्रिज पर 162.64 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 162.50 मीटर से 14 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर का रुख बढ़ने का बताया गया है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हरिद्वार डाउनस्ट्रीम से 1,21,147 क्यूसेक, बिजनौर डाउनस्ट्रीम से 1,32,811 क्यूसेक और नरौरा बैराज डाउनस्ट्रीम से 99,297 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।


आंगन डूबा तो चौका भी नहीं बचा

गंगा किनारे बसे मूंजखेड़ा, नगला दुर्जन, नगला नरपत, नगला खना, नगला पदम, नगला जयकिशन समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन चुका है। गलियों और रास्तों में पानी पहले से भरा है। अब कई घरों के आंगन से होता हुआ पानी अंदर तक पहुंचने लगा है।


जिन परिवारों के घरों में पानी घुस गया है, उनके सामने सबसे बड़ी चिंता राशन, बिस्तर, कपड़े और घरेलू सामान बचाने की है। चारपाइयों पर सामान चढ़ा दिया गया है। अनाज को ऊंचे स्थानों पर रखा जा रहा है। कई घरों में रसोई तक पानी पहुंचने से खाना बनाने का संकट खड़ा हो गया है। जिस चौके में परिवार का चूल्हा जलता था, वहां अब पानी खड़ा है।


रास्ते डूबे, नाव बनी सहारा

बाढ़ ने गांवों की राह भी रोक दी है। जरूरत का सामान लेने, दवा लाने या किसी जरूरी काम से बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। कई स्थानों पर नाव ही आवागमन का सहारा बनी हुई है।

बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए यह स्थिति और ज्यादा मुश्किल है। पानी के बीच से निकलते समय हादसे का डर बना रहता है। ग्रामीणों की चिंता सिर्फ आज की नहीं, बल्कि इस बात की भी है कि अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो आगे क्या होगा।


पशुओं के लिए सूखा चारा जुटाना भी चुनौती

बाढ़ की मार इंसानों के साथ पशुओं पर भी पड़ रही है। घरों के आसपास पानी भरने से पशुओं को सुरक्षित स्थान पर बांधना मुश्किल हो गया है। सूखा चारा बचाना और लगातार उपलब्ध कराना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है। कई परिवार अपने पशुओं को ऊंचे स्थानों पर रखने को मजबूर हैं।


ठहरे पानी के साथ बढ़ा मच्छरों का कहर

लंबे समय से जगह-जगह जमा बाढ़ के पानी ने अब मच्छरों की समस्या भी बढ़ा दी है। शाम होते ही गांवों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। ग्रामीणों को बच्चों और बुजुर्गों की चिंता सताने लगी है।

ग्रामीण उर्वेश यादव ने बताया कि गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया है, लेकिन मच्छरों की समस्या कम नहीं हुई है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित गांवों में नियमित फॉगिंग कराने की मांग की है, ताकि मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से लोगों को राहत मिल सके।

एक माह से अंधेरे में कट रही रात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बिजली संकट ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। ग्रामीणों के मुताबिक  बाढ के चलते करीब एक माह से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। दिनभर पानी और कीचड़ से जूझने के बाद जब रात आती है तो घरों में अंधेरा पसर जाता है।

मोबाइल चार्ज करने से लेकर बच्चों की पढ़ाई और घरों में रोशनी तक की समस्या बनी हुई है। बाढ़ के पानी ने जहां रास्ते छीन लिए हैं, वहीं बिजली संकट ने रातों की रोशनी भी छीन ली है।

बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की जिंदगी इस समय राहत और इंतजार के बीच झूल रही है। बढ़ता जलस्तर उन्हें डरा रहा है, ठहरा पानी मच्छरों का प्रकोप बढ़ा रहा है और बिजली संकट रातों को मुश्किल बना रहा है।

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