जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। ग्राम सुजावलपुर में जमीन के बंटवारे से जुड़े विवाद में कथित रूप से गलत तथ्यों के आधार पर पांच दानपत्र पंजीकृत कराने का मामला सामने आया है। मोहम्मद विलाल खान की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कासगंज के न्यायालय ने गंजडुंडवारा पुलिस को एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है।
न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र के अनुसार मोहम्मद विलाल खान पुत्र इकबाल खान ग्राम सुजावलपुर का निवासी है। उसके मुताबिक उसके बाबा अब्दुल मजीद की मृत्यु पूर्व में हो चुकी है और वह अपने वारिसों के लिए कुछ भूमिधरी छोड़ गए थे। आरोप है कि इन भूमियों का पूर्वजों द्वारा आपसी बंटवारा कर लिया गया था और उसी के आधार पर परिवार के लोग लंबे समय से अपनी-अपनी संपत्तियों पर काबिज हैं।
शिकायतकर्ता ने अपनी ताई अनवरी बेगम पत्नी अशफाक खां, जैद खान पुत्र मोहम्मद साजिद खान, साजिद खान पुत्र वाशिद खान, मोहम्मद शावन शेख पुत्र जिकरुल हसन और आफाक पुत्र इस्तियाक को आरोपी बनाया है।
10 जनवरी 2025 को कराए गए पांच दानपत्र
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि अनवरी बेगम ने 10 जनवरी 2025 को मोहम्मद जैद खान के नाम पांच अलग-अलग दानपत्र पंजीकृत कराए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दानपत्रों में स्वयं को प्राप्त संपत्ति से अलग भूमि को भी शामिल किया गया, जबकि संबंधित संपत्ति पर अनवरी बेगम का पूर्ण अधिकार नहीं था।
शिकायत में यह भी आरोप है कि दानपत्रों में रिश्तों के संबंध में भी गलत तथ्य अंकित किए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि जैद खान को अनवरी बेगम का सगा नाती दर्शाया गया, जबकि उसके अनुसार ऐसा नहीं है। साथ ही दानपत्रों में मोहम्मद साजिद खान को अशफाक खां का पुत्र दर्शाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
गाटा संख्या 89 और 222 पर कब्जे का दावा
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दानपत्रों में दर्शाई गई गाटा संख्याओं का पूर्व में ही पारिवारिक बंटवारा हो चुका था। उसके अनुसार अनवरी बेगम के पति अशफाक खां ने अपने भाइयों की सहमति से आपसी बंटवारा किया था। इसी बंटवारे के आधार पर गाटा संख्या 89 और 222 शिकायतकर्ता मोहम्मद विलाल खान और वाशिद पुत्र अब्दुल मजीद के हिस्से में आए थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त दोनों गाटा संख्याओं पर उसका कब्जा है और वर्तमान में उसकी जोती-बोई फसल भी खड़ी है। आरोप है कि इसके बावजूद अनवरी बेगम ने बिना अधिकार के गलत तथ्यों का उल्लेख करते हुए इनसे संबंधित भूमि को पांचों दानपत्रों में शामिल करा दिया।
दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल का आरोप
प्रार्थना पत्र में दानपत्रों के पंजीकरण में शामिल गवाह मोहम्मद शावन शेख सहित आरोपियों पर दस्तावेजों में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर और संज्ञेय प्रकृति का अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले गंजडुंडवारा थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक कासगंज को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजा, लेकिन वहां से भी कार्रवाई नहीं होने पर उसने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय के आदेश से अब होगी पुलिस जांच
मामले में 7 अगस्त 2026 को न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय के आदेश की प्रमाणित नकल में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर गंजडुंडवारा थाना पुलिस से एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने और विवेचना के परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने की मांग की गई है।
हालांकि, प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोप अभी शिकायतकर्ता के आरोप हैं। आरोपों की वास्तविकता, दानपत्रों में दर्ज तथ्यों और संबंधित भूमि पर अधिकार को लेकर स्थिति पुलिस की विवेचना तथा उपलब्ध राजस्व एवं पंजीकरण अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।