शहर की प्रसिद्ध ओसीएफ रामलीला को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर वर्ष होने वाली इस रामलीला में इस बार भगवान श्रीराम के किरदार को लेकर बदलाव चर्चा में है। पिछले करीब 12 वर्षों से श्रीराम की भूमिका निभा रहे रोहित सक्सेना को इस बार यह अवसर नहीं मिला है। इससे वह खासे आहत हैं।
रोहित सक्सेना लंबे समय से पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ श्रीराम का किरदार निभाते आ रहे थे। लगातार एक ही भूमिका निभाने के कारण रामलीला देखने वाले लोगों के बीच उनकी अलग पहचान बन गई थी। उनके अभिनय को दर्शक श्रीराम के चरित्र से जोड़कर देखते रहे हैं।
इस बार श्रीराम की भूमिका में बदलाव किए जाने के बाद रोहित सक्सेना की भावनाएं सामने आई हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पिछले 12 वर्षों में इस भूमिका को महज अभिनय के तौर पर नहीं निभाया, बल्कि इसे भगवान श्रीराम की सेवा और भक्ति के रूप में स्वीकार किया। ऐसे में भूमिका से अलग किया जाना उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी कठिन है।
रामलीला से जुड़ी हैं आस्था और भावनाएं
ओसीएफ की रामलीला शहर के प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। इसमें कलाकारों के लिए मंच पर निभाए जाने वाले किरदार केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी आस्था और भावनाओं से भी जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि वर्षों से श्रीराम की भूमिका निभाने वाले कलाकार के बदले जाने की चर्चा रामलीला से जुड़े लोगों के बीच हो रही है।
रोहित सक्सेना के लंबे समय तक श्रीराम का किरदार निभाने के कारण दर्शकों में भी उनकी भूमिका को लेकर एक जुड़ाव बन गया था। इस बार बदलाव के बाद रामलीला प्रेमियों के बीच अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, भूमिका में बदलाव के पीछे रामलीला आयोजन समिति की ओर से क्या कारण बताए गए हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में समिति का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।