सिढ़पुरा में स्वास्थ्य सेवाओं पर बारिश की मार, अस्पताल के कमरों में भरा गंदा पानी तो सड़क बनी ओपीडी; गंभीर मरीजों को एंबुलेंस से भेजना पड़ रहा दूसरे स्वास्थ्य केंद्र
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
सिढ़पुरा। बीमारियों का इलाज करने वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) खुद ही बदहाली का शिकार हो गया है। पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने अस्पताल की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल भवन के कमरों से लेकर परिसर तक गंदे पानी में डूबा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों का इलाज अस्पताल के भीतर नहीं, बल्कि सड़क किनारे बैठकर किया जा रहा है। जिस अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए, वहां डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी खुले आसमान के नीचे उपचार करने को मजबूर हैं। गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के माध्यम से दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जा रहा है। हर साल बारिश में यही तस्वीर सामने आती है, लेकिन जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
मौसम में लगातार बदलाव के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। कुत्ता काटने, टीबी, सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मगर अस्पताल के कमरों में भरे गंदे पानी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को जलभराव के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क किनारे सिमटी अस्पताल की ओपीडी
अस्पताल भवन में पानी भरने के कारण प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप गौतम के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सड़क किनारे बैठकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल के भीतर जहां मरीजों को दवा और उपचार मिलना चाहिए, वहां गंदा पानी भरा हुआ है। गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए एंबुलेंस के माध्यम से दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया जा रहा है। ऐसे में बारिश के बीच मरीजों के लिए इलाज कराना किसी चुनौती से कम नहीं है।
हर साल जलभराव, स्थायी समाधान नदारद
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। बारिश होते ही अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगती हैं। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। हर साल अस्पताल में पानी भरने से मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से अस्पताल भवन की मरम्मत कराने तथा जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दौरान भी स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
विडंबना यह है कि बीमारियों से राहत देने वाला अस्पताल खुद जलभराव की बीमारी से जूझ रहा है। हर साल बारिश में अस्पताल के डूबने और सड़क किनारे इलाज होने की तस्वीर सामने आने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।