जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। विकास की गाड़ी अगर सामान्य रास्ते से चले तो शायद उसे नगर पालिका की कार्यप्रणाली कहां समझ आएगी! यहां तो व्यवस्था कुछ अलग ही अंदाज में चलती दिखाई दे रही है। पहले फुटपाथ उखाड़ दीजिए, राहगीरों को डेढ़ माह तक ठोकरें खाने दीजिए और फिर उसी जगह काम कराने के लिए टेंडर निकाल दीजिए। यही कुछ कैनाल रोड पर देखने को मिल रहा है।
कैनाल रोड पर डॉ. आकाश पुंडीर के घर के सामने और आसपास की फुटपाथ करीब डेढ़ माह पहले ही उखाड़ दी गई। राहगीरों के लिए रास्ता मुश्किल हुआ तो शायद यह विकास की तैयारी रही होगी, लेकिन मजेदार बात यह है कि जिस काम की तैयारी जमीन पर पहले ही शुरू हो गई थी, उसका टेंडर नगर पालिका ने 22 सितंबर को दो लाख रुपये से अधिक की लागत से निकाला।
यानी फुटपाथ को टेंडर का इंतजार नहीं था! उसे पहले ही उखाड़ दिया गया। अब टेंडर प्रक्रिया के बाद उसी जगह को दोबारा व्यवस्थित करने की कवायद होगी। तब तक राहगीर सड़क और उखड़ी फुटपाथ के बीच अपना रास्ता खुद तलाशते रहें।
‘जानकारी के अभाव’ में खोद दी फुटपाथ
मामले में नगर पालिका के जेई हेमंत कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है। एक ठेकेदार ने जानकारी के अभाव में उक्त स्थल को खोद दिया था। इसी वजह से अब वहां कार्य के लिए टेंडर निकाला गया है।
जेई के इस जवाब ने व्यवस्था की तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है। सवाल यह है कि ठेकेदार को जानकारी नहीं थी तो पालिका को जानकारी कब हुई? और अगर जानकारी होने के बाद भी करीब डेढ़ माह तक फुटपाथ इसी हालत में रही तो राहगीरों की जानकारी किसके भरोसे थी?
पहले ठोकर, बाद में टेंडर—यही है विकास का नया क्रम
आमतौर पर उम्मीद होती है कि पहले योजना बनेगी, स्वीकृति होगी, टेंडर होगा, कार्यादेश जारी होगा और फिर निर्माण कार्य शुरू होगा। लेकिन कैनाल रोड का मामला इस क्रम को थोड़ा नया रूप देता नजर आ रहा है—पहले फुटपाथ उखड़ी, फिर परेशानी हुई और अब टेंडर निकला।
पालिका की निगरानी व्यवस्था भी इस पूरे घटनाक्रम में सवालों के घेरे में है। यदि किसी ठेकेदार ने जानकारी के अभाव में स्थल खोद दिया तो उसे रोकने वाला कौन था? सरकारी स्थल को खोदने के बाद उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी? और राहगीरों की परेशानी दूर करने के लिए तत्काल कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
राहगीर बोले—साहब, विकास अपनी जगह है, रास्ता तो रहने दीजिए
डेढ़ माह से उखड़ी पड़ी फुटपाथ राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। लोगों को सड़क का सहारा लेकर निकलना पड़ रहा है। अब उन्हें उम्मीद है कि टेंडर के बाद कागजी प्रक्रिया जमीन पर भी दिखाई देगी और फुटपाथ फिर से चलने लायक बन सकेगी।
फिलहाल कैनाल रोड का यह मामला नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर एक चुटीला सवाल जरूर छोड़ रहा है—जब टेंडर बाद में निकलना था तो फुटपाथ पहले ही क्यों उखाड़ दी गई?