‘पूरा एक दे जाना, नेतागिरी मत करना… जेल जाओगे’, कथित बातचीत पर बढ़ीं मुश्किलें; जिला विकास अधिकारी की तहरीर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत तीन धाराओं में केस
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कासगंज। कथित कमीशन के बंटवारे को लेकर वायरल वीडियो से सुर्खियों में आए पटियाली के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) संजीव कुमार की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। पहले निलंबन और अब मुकदमा दर्ज होने से मामला और गंभीर हो गया है। जिला विकास अधिकारी, कासगंज की तहरीर पर पटियाली थाने में बीडीओ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की दो धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। तहरीर में अधीनस्थ कर्मचारी से अवैध धनराशि मांगने, अश्लील गाली देने और जेल भेजने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।
‘पूरा एक दे जाना, नेतागिरी मत करना’
24 अक्टूबर 2026 को दी गई तहरीर के मुताबिक, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में बीडीओ संजीव कुमार अपने कार्यालय में बैठकर तेज आवाज में अपने किसी अधीनस्थ कर्मचारी से कथित तौर पर धनराशि मांगते सुनाई दे रहे हैं। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि वह कहते हैं, ‘पूरा एक दे जाना, नोट कर लेना, नेतागिरी मत करना।’ इसके बाद अश्लील गाली देते हुए जेल जाने की बात कहने का भी उल्लेख किया गया है। जिला विकास अधिकारी ने इस कथित आचरण को अधीनस्थ से अवैध धन की मांग और शासकीय कार्यालय में भ्रष्टाचार का द्योतक बताते हुए एफआईआर दर्ज कराने का अनुरोध किया।
10 प्रतिशत कमीशन के कथित बंटवारे से शुरू हुआ मामला
बीडीओ का 53 सेकंड का वीडियो 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसमें कथित तौर पर विकास कार्यों में 10 प्रतिशत कमीशन में से चार प्रतिशत अधिकारियों को देने की बातचीत का दावा किया गया। वीडियो में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) तक हिस्से के बंटवारे का जिक्र होने की बात सामने आई थी। ‘सिस्टम बना हुआ है’ और ‘एक से कम नहीं लूंगा’ जैसे कथित संवादों ने मामले को चर्चा में ला दिया था।
डिप्टी सीएम के निर्देश पर निलंबन, अब कानूनी शिकंजा
वीडियो सामने आने के बाद शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद संजीव कुमार को निलंबित कर दिया गया। अब जिला विकास अधिकारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होने से विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक जांच का रास्ता भी खुल गया है।
पुलिस की कार्रवाई में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352, धारा 351(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 शामिल हैं। पुलिस के अनुसार मामले में आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर होगी।